भोपाल। पंचायत एवं नगरीय निकाय चुनाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए पंचायतों-नगरीय निकायों में आरक्षित सीटें अनारक्षित में परिवर्तित हो जाएंगी। अब एससी और एसटी वर्ग के लिए आबादी के हिसाब से सीटें आरक्षित होंगी। इसके तहत 52 जिला पंचायतों में 14 जिला अध्यक्ष के पद अजा और आठ अजजा के लिए आरक्षित होंगे। पंच, सरपंच और वार्ड निर्वाचन क्षेत्र भी जनसंख्या के अनुसार आरक्षित किए जाएंगे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर राज्य निर्वाचन आयोग ने तैयारी शुरू कर दी है। विधि विशेषज्ञों से परामर्श किया जा रहा है। शासन को पत्र लिखकर आरक्षण की प्रक्रिया करने के लिए कहा जाएगा। वहीं, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग आरक्षण का कार्यक्रम घोषित करेगा। राज्य निर्वाचन आयुक्त बसंत प्रताप सिंह ने अधिकारियों के साथ बैठक भी की। सुप्रीम कोर्ट ने आयोग को दो सप्ताह में आदेश पर अमल करने के लिए कहा है। इसी में अधिसूचना भी जारी करनी है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि आदेश का शासन स्तर पर परीक्षण कराया जा रहा है। पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की तैयारी की जा रही है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग भी इसी स्थिति में है।स्थानीय निकायों के चुनाव में अभी तक ओबीसी को 25 प्रतिशत आरक्षण मिल रहा था। पंचायत एवं ग्रामीण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण दिए जाने का प्रविधान है। इसके मायने यह हुए कि अजा-अजजा वर्ग के लिए आरक्षित स्थान होने के बाद जो स्थान शेष रहते हैं, उसमें ओबीसी के लिए अधिकतम 25 प्रतिशत स्थान आरक्षित किए जा सकते हैं। आलीराजपुर, झाबुआ जैसे जनजाति बाहुल्य क्षेत्र में सभी पद इन्हीं वर्गों के लिए आरक्षित होते हैं लेकिन जहां आबादी कम है, वहां अन्य पिछड़ा वर्ग को अधिक पद मिलते हैं।प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत और नगरीय निकायों के चुनाव कांग्रेस सरकार भी नहीं करवा पाई थी। उसने पंचायतों का परिसीमन कराया लेकिन यह लागू नहीं हो पाया। नगरीय निकायों के निर्वाचन प्रतिनिधियों का कार्यकाल नवंबर, 2019 में समाप्त हुआ था। वहीं, पंचायतों के प्रतिनिधियों का कार्यकाल मार्च, 2020 में पूरा हो गया था। कुछ समय तो सरकार ने प्रशासकों से निकायों का संचालन कराया फिर पंचायतों में प्रधान की व्यवस्था लागू कर दी। पूर्व पंचायतों के सरपंचों को ही प्रधान बनाकर उन्हें वित्तीय अधिकार दे दिए। मालूम हो कि त्रिस्तरीय पंचायत के पहले चरण का चुनाव छह जनवरी, 2022 को होना था। राज्य निर्वाचन आयोग ने दस दिन पहले 28 दिसंबर, 2021 को चुनाव निरस्त कर दिए। पहले और दूसरे चरण के चुनाव के लिए नाम वापसी के बाद सवा दो लाख से ज्यादा अभ्यर्थी प्रचार में जुटे हुए थे। दरअसल, मध्य प्रदेश पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज संशोधन अध्यादेश वापस होने के बाद मतदाता सूची 2019 के परिसीमन के अनुसार नहीं रह गई थी।
*सम्पूर्ण समाचारो के लिए न्याय क्षेत्र भोपाल होगा समाचार का माध्यम मध्य प्रदेश जनसम्पर्क है
एससी-एसटी के लिए आबादी के हिसाब से होंगी सीटें आरक्षित
Reviewed by Editor Desk
on
मई 12, 2022
Rating: 5
कोई टिप्पणी नहीं