देश के पर्यटन नक्शे में तेजी से उभरता छत्तीसगढ़
हेमंत प्रशांत कारफार्मा
छत्तीसगढ़ एक ऐसी पवित्र भूमि है जहां वनवास काल में भगवान राम के चरण उत्तर में कोरिया जिले के सीतामढ़ी हरचौका से दक्षिण में सुकमा जिले के कोंटा तक पड़े थे। आपको बता दें की छत्तीसगढ़ जिससे श्री राम जी की माता का जन्मभूमि स्थल भी है जिसे पूर्व में दक्षिण कौशल के नाम से जाना जाता था। छत्तीसगढ़ राज्य जोकि उत्तर दिशा से दक्षिण दिशा तक 700 किलोमीटर पर विशाल क्षेत्र में फैला विविध प्रकार के प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक धरोहर को समेटे हुए है। जो कि यहां धरती वन, वन्य जीव, नदी, पर्वत - पहाड़ और झरनों जैसी प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है। अगर बात करें उत्तर दिशा के पाठ चित्र से दक्षिण दिशा की पहाड़ियों की तो वह प्रकृति द्वारा उपेरे अनेक रमणीय प्राकृतिक स्थल और अनुपम सौंदर्य किस राज्य को मिली प्रकृति वरदान है। वही बात की जाए भगौलिक खूबसूरती और सांस्कृतिक विरासत की तो यहां छत्तीसगढ़ में पर्यटन विकास की असीम संभावनाएं हैं, यहां के प्राचीन विरासत, धार्मिक स्थल और प्राकृतिक सुंदरता जो कि पर्यटकों को को सुखद अनुभूति देते हैं। छत्तीसगढ़ में अनगिनत ऐसे रमणीय प्राकृतिक स्थल विद्यमान है जो कि पर्यटकों को बरबस ही अपनी ओर आकर्षित करते हैं। इसके अलावा बीते कुछ समय में राज्य के दुर्गम इलाकों में कुछ नए प्राकृतिक स्थलों की भी पहचान की गई है, जिनके विकास के प्रयास किए जा रहे हैं। इन पर्यटन स्थलों में पर्यटन की दृष्टि से नई सुविधाएं विकसित की जा रही है।
राज्य में पर्यटन की विकास की असीम संभावनाओं को देखते हुए छत्तीसगढ़ के वर्तमान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के दिशा निर्देश पर राज्य भर के प्राकृतिक और सांस्कृतिक महत्व के स्थलों का विकास किया जा रहा है। यहां के पर्यटन क्षेत्रों को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति दिलाने बहु-आयामी विकास की दिशा में कार्य किए जा रहे हैं। जनजातीय अंचल की प्राकृतिक एवं कला संस्कृति को विश्व पटल पर लाने के लिए राज्य सरकार द्वारा विशेष प्रयास भी किए जा रहे हैं। रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में ग्रामीण पर्यटन का विकास किया जा रहा है। इन स्थलों में मुख्य रूप से छत्तीसगढ़ का गढ़कलेवा जहां विशेष रुप से छत्तीसगढ़ की खान-पान को महत्व दिया जा रहा है साथ ही आवाज की सुविधा युक्त होटल,रिसॉर्ट एवं रेस्टोरेंट की सुविधा विकसित की जा रही है।
स्वदेश दर्शन योजना के तहत छत्तीसगढ़ के 13 स्थानों पर "ट्राईबल टूरिज्म सर्किट" विकसित की जा रही है। इस परियोजना के तहत जशपुर,कुनकुरी, मैनपाट, कमलेश्वरपुर, महेशपुर, कुरदर, सरोधादादर, गंगरेल, नथियानवागांव, कोंडागांव, जगदलपुर, चित्रकूट और तीरथगढ़ को विकसित किया जा रहा है। इनमें से कुरदर हील इको रिजॉर्ट कुरदर (बिलासपुर), बैगा एथनिक रिसॉर्ट सरोधादादर (कबीरधाम), धनकुल एथनिक रिसॉर्ट (कोण्डागांव), सरना एथनिक रिसॉर्ट बालाछापर (जशपुर), कोईनार हाईवे ट्रीट नथियानवागांव (कांकेर), सतरेंगा बोट क्लब एंड रिसॉर्ट सतरेंगा (कोरबा) और वे साइड अमेनिटी महेशपुर (सरगुजा) में पर्यटन सुविधाएं विकसित की गई है।
भगवान राम का ननिहाल छत्तीसगढ़ राज्य राम नाम की महिमा यहां की संस्कृति में रची बसी हुई है। छत्तीसगढ़ के संस्कृत में में जब किसी से मिला जाता है तो राम नाम से संबोधन किया जाता है। यहां के कण-कण में राम का नाम बसा है। यही भगवान राम की माता "माता कौशल्या" का पूरे विश्व का एकमात्र मंदिर स्थित है। राजधानी रायपुर के निकट चंदखुरी नामक स्थान पर यह मंदिर स्थित है। इस स्थान की महिमा और जनमानस में बसी भगवान राम की आस्था को देखकर राज्य सरकार द्वारा चंदखुरी का विकास पौराणिक कथाओं में दर्शाए गए वातावरण के अनुसार किया जा रहा है। वनवास के दौरान भगवान राम के चरण जिस जिस स्थान पर पड़े उन राम मय क्षेत्र का विकास "राम वन गमन पर्यटन परिपथ विकास परियोजना" के माध्यम से किया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल द्वारा राम वन गमन पर्यटन परिपथ के 75 स्थलों को चुनना अंकित किया गया है। प्रथम चरण में नव स्थलों सीतामढ़ी-हरचौका (कोरिया), रामगढ़ (सरगुजा), शिवरीनारायण (जांजगीर-चांपा), तुरतुरिया (बलौदाबाजार), चंदखुरी (रायपुर), राजिम (गरियाबंद), सिहावा-सप्तऋषि आश्रम (धमतरी), जगदलपुर (बस्तर) और रामाराम (सुकमा) में "राम वन गमन पर्यटन परिपथ" के रूप में नई सुविधाएं विकसित की जा रही है। पूरे परिसर का सौंदर्यीकरण भी किया जा रहा है राम वन गमन पर्यटन परिपतथ की लगभग लंबाई 2260 किलोमीटर है जिसका निर्माण, चौड़ीकरण एवं मरम्मत का कार्य किया जा रहा है। यहां पर्यटकों के ठहरने, भोजन, पानी, पार्किंग आदि की व्यवस्था के लिए छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल द्वारा कार्य किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ राज्य के डोंगरगढ़ पहाड़ी पर माता बमलेश्वरी देवी विराजमान है। मां बमलेश्वरी की इस नगरी डोंगरगढ़ को भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने प्रसाद योजना में शामिल किया है। इस योजना के तहत डोंगरगढ़ का महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल के रूप में व्यवस्थित विकास का काम हाथ में लिया गया है। यहां श्रद्धालुओं के लिए "श्री यंत्र" के बनावट के अनुरूप पिलग्रिम एक्टिविटी सेंटर (श्रद्धालुओं के लिए सुविधा केंद्र) का निर्माण किया जाएगा। पर्यटकों की सुविधाओं के लिए उच्च स्तरीय पर्यटन सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। राज्य के प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर स्थानों पर एथनिक रिसॉर्ट, कॉटेज, वाटर स्पोर्ट्स जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। छत्तीसगढ़ राज्य के पर्यटन स्थलों के बारे में पर्यटकों को सुलभ जानकारी उपलब्ध कराने तथा पर्यटन स्थलों के भ्रमण के लिए व्यक्तिगत एवं टूर पैकेज के अंतर्गत आरक्षण की सुविधाएं प्रदान करने के लिए छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल द्वारा प्रदेश के बाहर नई दिल्ली, बड़ोदरा (गुजरात) एवं जबलपुर सहित राज्य में 9 पर्यटन सूचना केंद्र स्थापित किया गया है।


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