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चुनाव लड़ने के लिए गाय पालना हो अनिवार्य, मंत्री के सुझाव पर MLA आरिफ मसूद बोले- पहले मॉब लिंचिंग से बचाने की गारंटी दें


मध्य प्रदेश (MP) के नवीनीकरण और पर्यावरण मंत्री हरदीप सिंह डांग (Minister Hardeep Singh Dang) ने एक सुझाव दिया है, जिसे लेकर राजनीतिक गलियारों में हलचल शुरू हो गई है. हरदीप सिंह डांग ने सुझाव दिया कि चुनाव लड़ने के लिए गाय पालना अनिवार्य हो. जिसके बाद विपक्षी दलों ने इस पर प्रतीक्रिया देना शुरू कर दिया है. कांग्रेस के विधायक का कहना है कि पहले गारंटी दी जाए कि मेरी मॉब लिंचिंग (Mob Lynching) नहीं होगी.

हरदीप सिंह डांग ने कहा कि इसे लेकर जागरूकता की भी जरूरत है कि लोग सिर्फ गाय को लेकर बड़ी-बड़ी बातें करते हैं लेकिन इन बड़ी-बड़ी बातों के अलावा जमीन पर भी काम होना चाहिए. डांग ने कहा की गाय को लेकर सरकार काम कर रही है, लेकिन आम लोगों को भी इस पर गंभीर होना चाहिए. यह तभी होगा जब सरकार इस तरह के कदम उठाएगी.

मंत्री हरदीप सिंह ने सुझाव दिए कि मध्य प्रदेश में किसी किसान के पास अगर गाय नहीं है तो रजिस्ट्री करने का अधिकार ना हो. शासकीय कर्मचारी जिसकी तनख्वाह 25,000 रुपए प्रति माह से ज्यादा है, उसके वेतन से 500 रुपए प्रति महीना गौ संवर्धन के लिए काटा जाए. इसके साथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए गाय पालना अनिवार्य किया जाए.

मॉब लिंचिंग से बचाने की गारंटी दें मंत्री: MLA आरिफ मसूद

पर्यावरण मंत्री हरदीप सिंह डांग के इन सुझावों के बाद कांग्रेस ने इस बयान पर प्रतिक्रिया दी. मामले में कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद (MLA Arif Masood) ने कहा कि वो गाय पालने को तैयार हैं, लेकिन क्या उन्हें सरकार सुरक्षा मुहैया कराएगी. आरिफ मसूद ने कहा कि उन्हें डर लगता है कि अगर वह गाय पालेंगे या उसकी रस्सी पकड़ेंगे तो उनके ऊपर भीड़ हमला न कर दे. विधायक आरिफ ने कहा कि अगर मॉब लिंचिंग से बचाने की गारंटी मंत्री हरदीप डांग देंगे तो वह उनका सुझाव मानने के लिए तैयार हैं. लेकिन सरकार, वर्तमान में गायों की जो परिस्थितियां हैं उनको भी देखें और इस तरह के फालतू सुझावों से बेहतर है कि वह गौ संवर्धन पर जरूरी काम करे.

पिछले 72 घंटों में करीब 20 गायों की मौत

मामले में अध्यात्म मंत्री ऊषा ठाकुर ने भी TV9 भारतवर्ष से बातचीत की. ऊषा ठाकुर ने कहा कि ऐसा अनिवार्य कर देना संभव नहीं है, लेकिन गौ संवर्धन को लेकर के जो जरूरी कदम हैं, वह उठाए जाने चाहिए. ऊषा ठाकुर ने कहा कि गाय हमारी संस्कृति में सर्वोपरि मानी गई है और इसके उद्धार के लिए जो भी अनुदान दिया जा रहा है, वह पर्याप्त है. गाय पर यह तो राजनीतिक बयानबाजी की बात है, लेकिन राज्य में असल तस्वीर कुछ और है. सूबे के राजगढ़ के खिलचीपुर तहसील में श्री कृष्ण गौशाला में पिछले 24 घंटे में 7 गाय की मौत हुई है, वहीं पिछले 2 दिनों में एक दर्जन से ज्यादा गायों की मौत हो चुकी है. यानी पिछले 72 घंटों में करीब 20 गायों की मौत केवल एक गौशाला में हुई है.

प्रति गाए प्रतिदिन मिलता है 20 रुपए अनुदान

मां जालपा गौशाला के अध्यक्ष नरेंद्र विजयवर्गीय बताते हैं की साल में 80 से 85 हजार रुपए अनुदान मिलता है, जिसमें गौशाला का रखरखाव करना और गायों की देखभाल करना संभव नहीं है. वर्तमान में सरकार प्रति गाय प्रतिदिन 20 रुपए अनुदान देती है, जिसमें गाय का रखरखाव और गौशाला का मेंटेनेंस दोनों करना होता है. पूर्व में अनुदान 1.20 रुपए प्रति गाय प्रति दिन था, जिसे 2019 में कमलनाथ की तत्कालीन सरकार ने बढ़ाकर 20 रुपए किया था.

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